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सुन्नी बांध प्रोजेक्ट: शिमला-मंडी के 12 गांवों की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू

➤ 382 मेगावाट सुन्नी बांध परियोजना के लिए 12 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित
➤ करीब 9 हेक्टेयर से अधिक निजी भूमि पर लागू होगी अधिसूचना
➤ प्रभावित परिवारों के विस्थापन की संभावना नहीं, 60 दिन में आपत्ति का मौका


हिमाचल प्रदेश में बहुप्रतीक्षित सुन्नी बांध जलविद्युत परियोजना को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। ऊर्जा विभाग हिमाचल प्रदेश ने इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर दी है।

इस परियोजना की क्षमता 382 मेगावाट बताई जा रही है, जिससे प्रदेश की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

किन क्षेत्रों की भूमि होगी अधिग्रहित?
अधिसूचना के अनुसार शिमला और मंडी जिलों के कुल 12 गांवों की लगभग 9 हेक्टेयर से अधिक निजी भूमि अधिग्रहण के दायरे में आएगी।

  • शिमला जिले की सुन्नी व कुमारसैन तहसील के गांव: मंगना, लुंसू, जैशी, भरारा, माजरोग
  • मंडी जिले की करसोग तहसील के गांव: भौरा, जकलीन, मगन, फाफन, परलोग, बेलुधांक, खारयाली

विस्थापन नहीं होगा – रिपोर्ट
सामाजिक प्रभाव आकलन (Social Impact Assessment) के अनुसार, इस परियोजना से किसी भी परिवार के विस्थापित होने की संभावना नहीं है। यह रिपोर्ट जिला प्रशासन और विशेषज्ञों की टीम द्वारा तैयार की गई है।

भूमि लेनदेन पर लगी रोक
अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में भूमि की खरीद-फरोख्त और हस्तांतरण पर रोक लगा दी गई है। यह प्रावधान भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा 11(4) के तहत लागू किया गया है।

आपत्ति दर्ज करने का अवसर
प्रभावित लोग अधिसूचना जारी होने के 60 दिन के भीतर अपने दावे या आपत्तियां संबंधित अधिकारी के समक्ष दर्ज कर सकते हैं।

विकास और रोजगार की उम्मीद
विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्र में रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी।